लंबा सफर है ज़िंदगी
हर लम्हा है सम-ऐ-हयात हर गली हर कूचा एक तपता सहारा .........
और इस तपते रेत के सहारा मैं जैसे तुम इक शीतल छाँव हो..............!
********
विरान सफर के थके थके क़दमों से मंजिल की तलाश मैं भटकती ये ज़िंदगी जैसे पानी की एक बूँद को तरसती निगाह ................दोस्तों को कमल शर्मा का प्यार भर सलाम आपके साथ रेडियो पर तो बहुत बातें होती हैं ब्लॉग के ज़रिये पहली बार आप के रूबरू होने की कोशिश हैं .......वक्त कम्बख्त हमेशा कम होता है लेकिन जैसे तैसे करके कुछ न कुछ आपसे बातें ज़रुर हो इसकी तमन्ना बड़े दिनों से थी और कई श्रोताओं की प्यार भरी सलाह भी की मैं आपसे विविध भारती के अलावा ब्लॉग पर भी बातें करूँ .......इसी कड़ी का ये प्रयास हैं जितना हो सके या यों कंहूँ ज्यादा से ज्यादा मुखातिब हो सकूं....
Sunday, June 1, 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
1 comment:
kamalji aapne blog shuru kiya hai ye jan kar bahut hi jyada khushi ho rahi hai aapke blog ka bahut dino se intezar tha
Post a Comment