Wednesday, July 2, 2008
Wednesday, June 18, 2008
ग़म की नदी में उम्र का पानी ठहरा ठहरा लगता है -ये फिकरा झूठा है लेकिन कितना सच्चालगता है
चार पलों या चार दिनों में होगा वो महदूद मगर जीस्तके आँगन में उम्र का दामनफैला फैला लगताहै
शीन काफ निजाम की ये पंक्तियाँ कितनी अच्छी लगती है जिंदगी का ये नजरिया वाकई बड़ा सच्चा है ...
ब्लॉग शुरू करने के बाद पता नही क्या-क्या घटनाएँ घटी के ब्लॉग आगे बढ़ ही न पाया ....मुंबई की उबड़ खाबड़ सड़केंकितनी खतरनाक है ये अनुभव मैंने अच्छे से प्राप्त करलिया --एक रिकॉर्डिंग से लौटते वक्त सान्ताक्रुज़ के ब्रिज से अपनी मोटर साइकिलसे ख़राब रोड की वजह सेस्किड होकर घायल होना पड़ा खैर अपने चाहने वालों की दुआओं और इश्वर की कृपा से फिर से आपका दोस्त ब्लॉग और विविध भारती के ज़रिये कॉम कल आपके सुझाव मिले तो ब्लॉग को अपडेट करने में काफ़ी मदद मिलेगी मुझे आप ईमेल इस पते पर कर सकते हैं -hkb1168@gmail.com
Sunday, June 1, 2008
एक बात
बातें तो बहुत है रेडियो की श्रोताओं की दोस्तों की यंहा की वहाँ की सारे जहाँ की कान्हा से शुरू करूँ शुरुआत सुबह के उजाले से कर रहा हूँ आज रविवारछुट्टी लेकिन मैंने आज की ड्यूटी ली हुई है गायिका मधुश्री से बातचीत का प्रोग्राम तैयार करने मैं लगा था इत्मिनान से छुट्टी के दिन का आनंद लेते हुए काम कर रहा था बीच मैं एक मित्र चले आए कुछ गपशप के बाद फिर वही काम खत्म करके अब कुछ देर पहले ही घर लौटा और बैठ गया आप से बातें करने पिछले दिनों राजस्थान के टूरपर गए थे कई सहकर्मी साथ थे दरअसल सर्दियों का मौसम था ,जैसलमेर जोधपुर दोनों जगह हम लोग गए थे भारत पाकसीमा को करीब से देखा जवानों से मिले किस मुस्तेइदीसे हमारी सीमाओं की चौकशी कर रहे हैं उनसे मिलकर बड़ा अभिभूत हुआ खूब बातें हुई प्रोग्राम भी किए जिसे बाद मैं विविध भारती से प्रसारित भी किया गया श्रोताओं से भी मिलना हुआ बड़ा ही प्यारा समा था. खूबसूरत जैसलमेर एक अलग तरह का मौसम अलग लोग बम्बैयाभाग दौड़ से दूर चमकता सूरज सोने जैसी सुनहरी मिटटी रेगिस्तान का खूबसूरत नज़ारा सचमुच जादुई था .ल्खाने को दिल तो बहुत करता है पर वक्त ड्यूटी पर कल वापस समय पर पहुँच ने की फिक्र भी बढ़ा रहा है ...कल ढेर सारी बातों के साथ मिलने की तमन्ना के साथ शुभलंबा सफर है ज़िंदगी .
लंबा सफर है ज़िंदगी
हर लम्हा है सम-ऐ-हयात हर गली हर कूचा एक तपता सहारा .........
और इस तपते रेत के सहारा मैं जैसे तुम इक शीतल छाँव हो..............!
********
विरान सफर के थके थके क़दमों से मंजिल की तलाश मैं भटकती ये ज़िंदगी जैसे पानी की एक बूँद को तरसती निगाह ................दोस्तों को कमल शर्मा का प्यार भर सलाम आपके साथ रेडियो पर तो बहुत बातें होती हैं ब्लॉग के ज़रिये पहली बार आप के रूबरू होने की कोशिश हैं .......वक्त कम्बख्त हमेशा कम होता है लेकिन जैसे तैसे करके कुछ न कुछ आपसे बातें ज़रुर हो इसकी तमन्ना बड़े दिनों से थी और कई श्रोताओं की प्यार भरी सलाह भी की मैं आपसे विविध भारती के अलावा ब्लॉग पर भी बातें करूँ .......इसी कड़ी का ये प्रयास हैं जितना हो सके या यों कंहूँ ज्यादा से ज्यादा मुखातिब हो सकूं....
हर लम्हा है सम-ऐ-हयात हर गली हर कूचा एक तपता सहारा .........
और इस तपते रेत के सहारा मैं जैसे तुम इक शीतल छाँव हो..............!
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विरान सफर के थके थके क़दमों से मंजिल की तलाश मैं भटकती ये ज़िंदगी जैसे पानी की एक बूँद को तरसती निगाह ................दोस्तों को कमल शर्मा का प्यार भर सलाम आपके साथ रेडियो पर तो बहुत बातें होती हैं ब्लॉग के ज़रिये पहली बार आप के रूबरू होने की कोशिश हैं .......वक्त कम्बख्त हमेशा कम होता है लेकिन जैसे तैसे करके कुछ न कुछ आपसे बातें ज़रुर हो इसकी तमन्ना बड़े दिनों से थी और कई श्रोताओं की प्यार भरी सलाह भी की मैं आपसे विविध भारती के अलावा ब्लॉग पर भी बातें करूँ .......इसी कड़ी का ये प्रयास हैं जितना हो सके या यों कंहूँ ज्यादा से ज्यादा मुखातिब हो सकूं....
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